Monday, April 15, 2024
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Why do we celebrate Dhanteras : क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार? जानिए इसका महत्व

Why do we celebrate Dhanteras – धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली से दो दिन पहले आता है, हालांकि, कभी-कभी तिथियों के मिलान के चलते इसके अगले दिन ही दिवाली का पर्व आ सकता है। जैसे कि इस साल, जब धनतेरस 23 अक्टूबर को और दिवाली 24 अक्टूबर को है।

शास्त्रों के अनुसार, धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का अवतार हुआ था। भगवान धन्वंतरि अमृत कलश में समुद्र मंथन के समय प्रकट होते हैं, इस कारण इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा प्रचलित है।


Why do we celebrate Dhanteras इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, और कुबेर जी की पूजा की जाती है। इस दिन कोई भी वस्त्र या सामग्री खरीदना शुभ माना जाता है।

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस के पर्व की महत्वपूर्णता और इसका इतिहास समझने के लिए हमें भगवान धन्वंतरि और समुद्र मंथन की कथा में गहरा अध्ययन करना पड़ता है। यह त्योहार समृद्धि, खुशियां और आरोग्य की प्राप्ति की प्रतीक है।

धनतेरस क्या है – What is Dhanteras in Hindi

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर मनाने जाते हुए पर्वों में से एक है। यह पर्व भारत में दिवाली के महोत्सव की शुरुआत का सूचक है।

हिन्दू समाज में धनतेरस का बहुत अधिक महत्व है, खासकर क्योंकि यह दीवाली, एक मुख्य त्योहार, से सीधे जुड़ा है। और यह त्योहार दीवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है।

भारत में धनतेरस का पर्व धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपावली, हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, और इसकी उत्सव श्रृंगार की आरंभिक घड़ी धनतेरस से ही शुरू होती है।

धनतेरस के दिन घर-घर में और मंदिरों में दीपक जलाने का सिलसिला शुरू होता है, जो दीपावली के उत्सव के समाप्त होने तक जारी रहता है।



Why do we celebrate Dhanteras इस महत्वपूर्ण दिन पर, भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की विशेष पूजा होती है। इसे शुभ माना जाता है कि इस दिन दीपक जलाए जाएं और नई चीज़ें खरीदी जाएं।

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धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?

दिवाली, पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस विशेष दिन पर, सोना और अन्य धन संपत्ति को खास महत्व दिया जाता है। देशभर में, लोग सोने, चांदी और अन्य मौद्रिक संपत्तियों में निवेश करते हैं और ये वस्त्रेण खरीदते हैं।

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस के अवसर पर, सोने, चांदी और पीतल के बर्तन शुभ माने जाते हैं। फिर भी, प्लास्टिक और कांच की वस्त्रेण से दूर रहना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि वे अशुभ होते हैं। इसी तरह, इस दिन चाकू, कैंची और अन्य नुकीले औजारों का उपयोग या खरीददारी से भी बचना चाहिए।

Why do we celebrate Dhanteras – धनतेरस क्यों मानते है?

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस का महत्व और इसे मनाने का कारण हिन्दू पौराणिक कथाओं में विस्तार से बताया गया है। इस पर्व को मनाने के पीछे विभिन्न प्राचीन कथाएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं…

सांप के रूप में यमराज की कहानी

Why do we celebrate Dhanteras एक समय किसी राज्य के युवराज की जन्म पत्रिका में यह अंकित था कि वह अपनी शादी के चार दिन बाद सर्पदंश से मर जाएगा।

इस संकट का समाधान करने के लिए, राजकुमारी ने अपने सभी सुनहरे गहनों को घर के द्वार पर रख दिया। जब सर्प रूप में आया यमराज उन चमकते हुए अभूषणों को देखा, वह अचंभित हो गया।




राजकुमारी ने सांप को घर में प्रवेश न करने के लिए स्वीत ध्वनियों में गीत गाया, जिससे सांप का ध्यान भटक गया। उसकी मधुर संगीत में खोकर सांप वहाँ से वापस लौट गया, और युवराज को कुछ नहीं हुआ।

समुद्र मंथन की कहानी

Why do we celebrate Dhanteras धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर, समुद्र मंथन के दौरान, भगवान धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुए थे।

इसी प्रकट होने की घड़ी पर भगवान धन्वंतरि के हाथ में अमृत भरा कलश था, जबकि माँ लक्ष्मी के हाथ में कोड़ी संजोए थे। इस ऐतिहासिक घड़ी को स्मरण करते हुए हर साल धनतेरस का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

भगवान धन्वंतरि के हाथ में कलश होने की वजह से धनतेरस के अवसर पर बर्तनों की खरीददारी को महत्व दिया जाता है। यह त्योहार ‘धनत्रयोदशी’ के रूप में भी समझा जाता है। जैन समुदाय में, इसे ‘ध्यान तेरस’ अथवा ‘धन्य तेरस’ के रूप में स्थान मिला है।

Why do we celebrate Dhanteras जैन शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान महावीर ने तीसरे और चौथे ध्यान में प्रवेश किया था और ध्यानयोग के द्वारा दीपावली के अवसर पर निर्वाण प्राप्त किया।

इसे ध्यान में उनकी अद्वितीय यात्रा के रूप में देखा जाता है, जिसकी वजह से जैन समाज में इस दिन का विशेष महत्व है।

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Why the festival of Dhanteras is celebrated? | Dhanteras | Who is the God Dhanvantari?

भगवान धन्वंतरि का हुआ था जन्म

समुद्र मंथन के समय, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर भगवान धन्वंतरि ने अमृत कलश संजोया और वह प्रकट हुए। मान्यता है कि चिकित्सा विज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए भगवान विष्णु ने धन्वंतरि के रूप में अवतार लिया। धन्वंतरि, जिन्हें देवताओं का चिकित्सक माना जाता है, से स्वास्थ्य और आरोग्य के आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।



धन्वंतरि जी के प्रकट होने की स्मृति में हर साल धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इसके दो दिन बाद, जब मान्यता है कि देवी लक्ष्मी प्रकट होती हैं, हम दीपावली का पर्व मनाते हैं।

श्री हरि विष्णु के वामन अवतार से भी है संबंध

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस के त्योहार से संबंधित एक प्रमुख मान्यता इस प्रकार है: जब देवता राजा बलि से डरते थे, तो भगवान विष्णु ने उनकी सहायता के लिए वामन रूप धारण किया। वामन ने राजा बलि के यज्ञ स्थल पर प्रकट होने पर, उससे तीन पग भूमि की भिक्षा मांगी।

इसके पहले, शुक्राचार्य ने भगवान विष्णु को उसके वामन रूप में पहचाना और राजा बलि से सुझाव दिया कि उसे वामन से कोई भी दान मांगने पर इंकार कर देना चाहिए। फिर भी, राजा बलि ने उसकी सलाह अनदेखी की। जब राजा बलि वामन को तीन पग भूमि देने का संकल्प ले रहा था, तो शुक्राचार्य ने उसे रोकने के लिए एक छोटी आकार में बदलकर बलि के कमंडल में प्रवेश किया।

जब कमंडल में जल नहीं बहकर निकला, तो वामन अवतार में भगवान विष्णु ने तुरंत समझ लिया कि शुक्राचार्य इसके पीछे हैं। वामन ने कुशा की सहायता से कमंडल को चुभाया, जिससे शुक्राचार्य की एक आंख क्षतिग्रस्त हो गई। उस समय की असहजता में शुक्राचार्य कमंडल से बाहर आ गए। बाद में राजा बलि ने वाचा देने की प्रतिज्ञा की और वामन को तीन पग भूमि का दान किया।



धनतेरस कब मनाया जाता है?

धनतेरस का महत्वपूर्ण पर्व प्रतिवर्ष हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर आया जाता है, जो दीपावली से दो दिन पहले होता है।

इस विशेष दिन पर, समुद्र मंथन के दौरान, भगवान धन्वंतरि अमृत कलश संग प्रकट होते हैं। इसी महत्वपूर्ण घड़ी में, माँ लक्ष्मी जी भी समुद्र की गहराइयों से प्रकट हुई थीं। इसलिए, इस दिन का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक है।

धनतेरस का पर्व वर्ष 2023 में कब है?

वर्ष 2023 में धनतेरस का पर्व 10 नवंबर, 2023 को मनाया जाएगा।

धनतेरस किसकी पूजा होती है?

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस का पर्व शास्त्रों के अनुसार अकाल मृत्यु के डर से मुक्त होने और यमराज से सुरक्षा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। साथ ही, इस दिवस पर धन की देवी, माँ लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की परंपरा प्राचीन समय से ही जारी है।

Here's why do we celebrate Dhanteras!

धनतेरस पूजा विधि

धनतेरस के अवसर पर संध्या समय की पूजा को विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन पूजा के स्थल पर उत्तर दिशा में भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर की प्रतिमाएँ रखनी चाहिए, और साथ में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएँ भी स्थापित की जानी चाहिए।

Why do we celebrate Dhanteras  मान्यता है कि दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से मृत्यु के अकस्मात कटौती से मुक्ति मिलती है।

भगवान धन्वंतरि को पीला रंग प्रिय है और भगवान कुबेर को सफेद, इसलिए पीली और सफेद मिठाई उन्हें अर्पित करनी चाहिए। चावल, दाल, रोली, चंदन, धूप और फल-फूल से पूजा में विशेष शक्ति आती है। धनतेरस के दिन, यमराज की उपासना भी महत्वपूर्ण है, और उनकी आदर में एक दीप जलाना अनिवार्य है।

धनतेरस का महत्व

Why do we celebrate Dhanteras

हिन्दू धर्म में धनतेरस के दिन पूजा और नई सामग्री की खरीददारी को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन किसी भी वस्तु की खरीददारी से उस वस्तु में 13 गुणा वृद्धि होती है। भगवान धन्वंतरि के हाथ में कलश होने की वजह से इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।



भगवान धन्वंतरि को पीले रंग और तांबे की प्रियता है, इसलिए इस दिन तांबा या चांदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है।

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस पर यमराज की उपासना और उनके नाम से दीपक जलाना भी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और घर में प्रकाश सदैव बना रहता है।

व्यापारी इस दिन अपने तिजोरी में कौंड़ी रखते हैं, क्योंकि माना जाता है कि माँ लक्ष्मी इस दिन प्रकट हुई थीं और उनके हाथ में कौंड़ी थी। इसे रखने से व्यापार में वृद्धि और समृद्धि बनी रहती है।

धनतेरस मनाने का उद्देश्य

Why do we celebrate Dhanteras आयुर्वेद के अनुसार, ‘धन’ का अर्थ है स्वास्थ्य। परंतु, जिन्होंने आयुर्वेद के सिद्धांतों को सही तरीके से नहीं समझा, वे ‘धन’ को सिर्फ मुद्रा के रूप में ही देखते हैं।

अज्ञानता की वजह से, जहाँ हमें स्वास्थ्य में निवेश करना चाहिए, वहीं आधुनिक समाज आर्थिक संपत्ति में निवेश करने के प्रति अधिक प्रवृत्त है।

आयुर्वेद सिखाता है कि सोना और चांदी के बर्तन में खाने पीने से स्वास्थ्य में लाभ होता है। लेकिन आज के लोग इसे आर्थिक लाभ के रूप में देखते हैं और इसी भ्रांति में सोने और चांदी के जेवर और बर्तन खरीदते हैं।

धनतेरस कैसे मनाया जाता है?

Why do we celebrate Dhanteras धनतेरस का दिन नए सामान खरीदने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस अवसर पर, लोग अक्सर नए बर्तन, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्त्र खरीदते हैं।

आज के समय में, धनतेरस पर गाड़ी जैसी महंगी चीजें खरीदना भी आम बन गया है। दीपावली के त्योहार की तैयारियों का आरंभ इसी दिन से होता है, जिसमें लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ, दीपक और अन्य पूजा सामग्री खरीदी जाती है।

संध्या समय में, परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान धन्वंतरि, कुबेर, यमराज और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं। इसके बाद, उन्हें मिठाई और फल प्रस्तुत किया जाता है।

इस शुभ दिन पर, हर घर की दीवारों पर दीपक जलाकर उनका सम्मान किया जाता है। इसी दिन, वित्तीय संपत्ति और नवीनतम खरीददारी की भी पूजा की जाती है। धनतेरस को दीपावली के त्योहार की प्रारंभिक धारा माना जाता है, और कुछ लोग इस अवसर पर पटाखे भी जलाते हैं।

लोग धनतेरस पर सोना क्यों खरीदते हैं?

Why do we celebrate Dhanteras हिंदुओं की विश्वास है कि भगवान धन्वंतरि के साथ ही, धन की देवी माँ लक्ष्मी घर में समृद्धि और धन लाती हैं।




Why do we celebrate Dhanteras  वे न केवल घर में वित्तीय स्थिरता लाती हैं बल्कि व्यापार में वृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त भी करती हैं। सोना और अन्य मौलिक धातुओं को सौभाग्य और अच्छे भविष्य का प्रतीक माना जाता है।

आज आपने क्या सीखा?

मुझे आशा है कि आपको मेरा लेख “Why do we celebrate Dhanteras: इसका महत्व और महात्म्य” पसंद आया होगा। मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि पाठकों को धनतेरस पर्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की जाए।

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